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सोमवार, 6 मई 2019

27. झूठ के पीछे क्या है

ज़ियाओजिंग हेज़ शहर, शानडोंग प्रांत
हर बार जब मैंने परमेश्वर के वचनों को हमें ईमानदार बनने और सही ढंग से बोलने के लिए कहते हुए देखा, मैंने सोचा, "मुझे सही ढंग से बोलने में कोई समस्या नहीं है। क्या यह सिर्फ सच को सच बोलना तथा चीजों को वैसे ही बताना नहीं है, जैसे कि वे हैं? क्या यह उतना आसान नहीं है? इस संसार में मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा चिढ़ाया है, वह है लोगों का सुशोभित तरीके से बोलना।" इस वजह से, मैंने अत्यधिक विश्वास को महसूस किया, यह सोचकर कि इस सम्बन्ध में मुझे कोई समस्या नहीं है।

रविवार, 5 मई 2019

26. पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

किन शुटिंग लिनयी शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कुछ समय से, यद्यपि मैंने परमेश्वर के वचनों को खाना और पीना बंद नहीं किया था, मैं कभी भी प्रकाश को महसूस नहीं करती थी। मैं ने इसके लिए परमेश्वर से प्रार्थना की थी लेकिन, उसके बाद भी, मुझे प्रबुद्ध नहीं किया गया था। इसलिए मैं सोचती थी कि, "मुझे जो खाना और पीना चाहिए था मैंने उसे खाया और पिया है और परमेश्वर मुझे प्रबुद्ध नहीं कर रहा है। ऐसा कुछ नहीं हैं जो मैं कर सकती हूँ, और मेरे पास परमेश्वर के वचन हासिल करने की योग्यता नहीं है।

शनिवार, 4 मई 2019

25. सेवा में समन्वय का महत्व

मेई जी जिनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कलीसिया के प्रशासन को उसके मूल रूप में बदलने के बाद, परमेश्वर के घर में अगुआ के हर स्तर के लिए साझेदारी स्थापित की गई थी। उस समय, मैं सोचती थी कि यह अच्छी व्यवस्था है। मेरी क्षमता कम थी और मेरे पास काफी काम था; मुझे वाकई एक साझेदार की ज]रूरत थी जो मेरे क्षेत्र में सभी तरह के कार्य पूरा करने में मेरी मदद करे।

सोमवार, 15 अप्रैल 2019

प्रश्न 1: बाइबल में लिखा है, "क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है" (रोमियों 10:10)। यीशु में अपने विश्वास के कारण हमें पहले ही बचा लिया गया है। एक बार बचा लिए जाने पर, हम अनंत काल के लिये बच जाते हैं। प्रभु के आने पर हम ज़रूर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकेंगे।

उत्तर: "एक बार हम बचा लिये जाते हैं तो हम हमेशा के लिये बच जाते हैं और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं," ये इंसानी दिमाग की उपज और कल्पना है। ये बात परमेश्वर के वचनों से बिल्कुल मेल नहीं खाती। प्रभु यीशु ने कभी नहीं कहा कि विश्वास के कारण बचाए जाने पर लोग स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं। प्रभु यीशु ने कहा है कि जो स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करते हैं, केवल वही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं। केवल प्रभु यीशु के वचनों में ही अधिकार और सत्य है। इंसान की धारणाएं और कल्पनाएं सच नहीं होतीं। वे स्वर्ग के राज्य में जाने का पैमाना नहीं हैं। हम जिस "विश्वास के ज़रिए उद्धार" की बात करते हैं, इसमें इंसान को सिर्फ क्षमा किया जाता है, उसे मुजरिम नहीं ठहराया जाता कानूनन मौत की सज़ा नहीं दी जाती।

रविवार, 14 अप्रैल 2019

प्रश्न 7: आज हम प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं; उनके नाम को फैलाने के लिये इतना त्याग करते हैं, हर चीज़ छोड़ रहे हैं। हम स्‍वर्गिक पिता की इच्छा का पालन ही तो कर रहे हैं। इसका मतलब है कि हम पवित्र बन चुके हैं। जब प्रभु आएंगे तो वो ज़रूर हमें स्वर्ग के राज्य में स्वर्गारोहित करेंगे।

उत्तर: जहां तक सवाल है कि स्वर्ग के राज्य में कौन प्रवेश कर सकता है: प्रभु यीशु ने कहा था, "जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)। प्रभु यीशु ने साफ तौर पर हमसे कहा है कि जो स्वर्ग के पिता की इच्छा पूरी कर सकता है, वही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। भाइयो और बहनो, ये बात सही है कि लोग प्रभु का नाम फैलाने के लिये हर चीज़ का त्याग करते हैं, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वो पाप भी अधिक कर रहे हैं। पाप करने का मतलब है कि वे शैतान के साथ हैं और अभी भी गंदे और दूषित हैं। वे अभी भी परमेश्‍वर का विरोध कर सकते हैं, धोखा दे सकते हैं।

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

प्रश्न 6: हम सब-कुछ त्याग दें, प्रभु के सुसमाचार का प्रचार करें और कलीसिया की देखभाल करें। इस तरह के कामों से हम स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा कर पाएंगे। इस तरह से अभ्यास करना क्या कोई गलत है?

उत्तर: प्रभु के सुसमाचार को फैलाना और उनके लिये कार्य करना ही स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करना नहीं होता। स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करने के लिये ज़रूरी है कि प्रभु के रास्ते पर चला जाए और उनके आदेशों का पालन किया जाए। इंसान अपना फ़र्ज़ उसी तरह निभाये जैसा प्रभु चाहते हैं। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा है, "तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37-39)। जहां तक स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करने की बात है, तो उसके लिये सबसे ज़रूरी है कि प्रभु यीशु के आज के वचनों का पालन किया जाए।

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

प्रश्न 4: हम सभी ने कई वर्षों तक प्रभु में विश्वास किया है, और प्रभु के लिए अपने कार्य में हमेशा पौलुस के उदाहरण का पालन किया है। हम प्रभु के नाम और उनके मार्ग के प्रति निष्ठावान रहे हैं, और धार्मिकता का ताज निश्चय ही हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। आज, हमें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और उनकी वापसी की ओर देखने की आवश्यकता है। केवल इस प्रकार से ही हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाइबल में ऐसा कहा गया है कि "मेरी बाट जोहनेवाले कभी लज्जित न होंगे" (यशायाह 49:23)। हमें प्रभु के वादे में विश्वास है: वे अपने लौटने पर हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाएँगे। क्या इस ढंग से कार्य-अभ्यास करने में वास्तव में कुछ गलत हो सकता है?

उत्तर: प्रभु के आगमन के लिए प्रतीक्षा करने में, ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि सीधे स्वर्ग का राज्य में ले जाए जाने के लिए उन्हें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और प्रभु के आगमन पर पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करने की जरूरत है। इस तरह से कार्य-अभ्यास करना उन्हें सही लगता है, और इससे कोई भी असहमत नहीं है। तब भी परमेश्वर में विश्वास करने वाले हम लोगों को हर चीज में सत्य की तलाश करनी चाहिए। हालांकि इस तरह से कार्य-अभ्यास करना लोगों की अवधारणाओं के अनुरूप है, किंतु क्या यह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप भी है? मुझे लगता है हमें जानना चाहिए कि: परमेश्वर के वचन हमारे कार्यों के सिद्धान्त हैं, ये वे आदर्श हैं जिनसे सभी लोगों, वस्तुओं और विषयों को मापा जाता है।

गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

प्रश्न 2: सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में अपने न्याय का कार्य कैसे करते हैं? वे अपने वचनों से इंसान का न्याय कैसे करते हैं, उसे शुद्ध कैसे करते हैं और उसे पूर्ण कैसे करते हैं? ये जानने के लिए हम बेताब हैं। अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य समझते हैं, तो हम लोग सचमुच परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं और हमें परमेश्वर के सिंहासन के सामने उन्नत किया जा सकता है। हमें ज़रा और विस्तार से बताइये!

उत्तर: अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपना कार्य किस तरह करते हैं, इस बात को समझना सत्य का अनुसरण करके उद्धार पाने की हमारी क्षमता के लिए बहुत आवश्यक है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में सत्य व्यक्त करके लोगों का न्याय और उन्हें शुद्ध करते हैं। वे मात्र अपने संतों को स्वर्ग के राज्य में उठाने के लिए ऐसा करते हैं। इसके बावजूद धार्मिक समुदाय में बहुत से विश्वासी परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझते। उन्हें लगता है कि प्रभु वापस आकर सभी संतों को सीधे स्वर्ग के राज्य में उन्नत कर देंगे।

बुधवार, 10 अप्रैल 2019

प्रश्न 1: कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए सलीब पर जान दी, उन्होंने हमें पापों से छुड़ाया, और हमारे पापों को क्षमा किया, भले ही हमारा पाप करना जारी है और हमारा अभी शुद्ध होना बाकी है, प्रभु ने हमारे सभी पापों को क्षमा कर हमारी आस्था के ज़रिये हमें न्यायपूर्ण बना दिया है। मुझे लगा कि प्रभु के लिये सबकुछ त्याग करने, यातना सहन करने और कीमत अदा करने की हमारी इच्छा, हमें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश दिलाएगी। मुझे लगा, हमारे लिये यही प्रभु की प्रतिज्ञा है। लेकिन कुछ लोगो ने इस पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार, चाहे हमने प्रभु के लिए श्रम किया, हम अभी भी पाप करके उन्हें स्वीकार करते हैं, इसलिए हम अभी तक अशुद्ध हैं। उनके अनुसार प्रभु पवित्र हैं, इसलिए अपवित्र लोग उनसे नहीं मिल सकते। मेरा सवाल है: हम लोगों ने प्रभु के लिए अपना सब-कुछ बलिदान कर दिया, क्या हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाया जा सकता है? दरअसल हमें इस सवाल का उत्तर नहीं पता, इसलिए हम चाहते हैं कि आप हमें इस बारे में बताएँ।

उत्तर: प्रभु के सभी विश्वासियों का मानना है: प्रभु यीशु ने सलीब पर दम तोड़कर हमें मुक्ति दिला दी, तभी हम सभी पापों से मुक्त हुए हैं प्रभु हमें पापी नहीं मानते। हम अपने, विश्वास के ज़रिये धर्मी बन गए हैं। अगर हम अंत तक सहन करते रहे तो हम बचा लिये जाएँगे। जब प्रभु आएँगे, तो वे सीधे ही हमें स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर देंगे। तो क्या ये वाकई सच है? क्या परमेश्वर ने इस दावे के समर्थन में अपने वचनों में कभी कोई सबूत दिया है? यदि यह दृष्टिकोण सत्य के अनुरूप न हो तो इसके परिणाम क्या होंगे? हम प्रभु के विश्वासियों को हर बात के लिये, अपने आधार के रूप में उनके वचनों का उपयोग करना चाहिए।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

प्रप्रश्न 4: प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को स्वर्ग का राज्य के रहस्यों के बारे में बताया, और क्या प्रभु यीशु की वापसी के रूप में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने भी अनेक रहस्य उजागर किए हैं? क्या आप लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा प्रकट किए गए कुछ रहस्यों के बारे में हमारे साथ संगति कर सकते हैं? इससे परमेश्वर की वाणी पहचानने में हमें बहुत सहायता मिलेगी।

उत्तर: प्रत्येक बार जब परमेश्वर देहधारण करते हैं, वे हमारे लिए अनेक सत्यों और रहस्यों को प्रकट करते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं। मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर देहधारण करते हैं, और इसलिए स्वाभाविक रूप से वे अनेक सत्यों को अभिव्यक्त करते हैं, और अनेक रहस्यों को प्रकट करते हैं। उदाहरण के लिए, अनुग्रह के युग में, देहधारी परमेश्वर, प्रभु यीशु ने उपदेश देने और अपना कार्य करने के क्रम में अनेक रहस्यों को प्रकट किया, "मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है" (मत्ती 4:17)। "जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा: परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)। इसके अतिरिक्त, प्रभु यीशु ने और भी अनेक रहस्य प्रकट किए, जिनके बारे में मैं अभी नहीं बोलूँगी।

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

प्रश्न 2: भाई डिंग ने अभी कुछ अराजक कामों के बारे में बात की थी, इसलिए जब आप कहते हैं कि अराजकता बढ़ रही है, तो आपका मतलब ऐसे कौन से ख़ास कामों से होता है?

उत्तर: अराजकता बढ़ने का अक्‍सर अर्थ होता है कि वे पादरी, एल्डर्स और अगुवा परमेश्‍वर की इच्छा के विपरीत जाकर अपनी ख़ुद की राह पर चल रहे हैं। वे परमेश्‍वर की आज्ञाओं का अनुसरण नहीं करते, और लोगों को बंधन में जकड़ने, नियंत्रण में रखने और धोखा देने के लिए बाइबल की गलत व्याख्या करते हैं; उन्हें बाइबल संबंधित धर्मशास्त्र में डुबो कर, परमेश्‍वर से दूर ले जाते हैं, और कलीसिया को धार्मिक कर्मकांड की जगह में बदलते हुए, अपने दायित्‍वों और कर्तव्यों को वे अपनी प्रतिष्ठा और कमाई का जरिया समझने लगते हैं, जो कलीसिया में परमेश्‍वर का विरोध करने वाले कई पाखण्डी कार्यों की ओर ले जाता है।

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

प्रश्न 1: पिछले कुछ सालों में हमने हमारे कलीसीया में बढ़ती हुई वीरानी को महसूस किया है। हमने अपने शुरुआती विश्वास और प्यार को खो दिया है, हम कमज़ोर और ज्‍़यादा नकारात्मक बन गए हैं। यहां तक कि कभी-कभी हम उपदेशक भी खोया-खोया महसूस करते हैं, और नहीं जानते कि किस बारे में बात करनी है। हमें लगता है कि हमने पवित्र आत्मा का कार्य खो दिया है। हमने पवित्र आत्मा के कार्य वाली किसी कलीसिया के लिए भी हर जगह खोज की। लेकिन जिस भी कलीसिया को हमने देखा, वह हमारी कलीसिया की तरह ही वीरान है। इतनी सारी कलीसियाएं भूखी और वीरान क्यों हैं?


उत्तर: आपका सवाल महत्वपूर्ण है। हम सभी जानते हैं कि हम अंत के दिनों की आखरी अवस्‍था में रहते हैं। प्रभु यीशु ने एक बार भविष्यवाणी की थी: "अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा पड़ जाएगा" (मत्ती 24:12)। धर्म की दुनिया में अराजकता बढ़ रही है। धार्मिक अगुवा प्रभु की आज्ञाओं का पालन नहीं करते, सिर्फ़ मनुष्यों की परंपराओं का पालन करते हैं। वे सिर्फ़ दिखावे के लिए बाइबल के ज्ञान का उपदेश देते हैं और ख़ुद की गवाही देते हैं। वे परमेश्‍वर की गवाही नहीं देते या उनकी बिल्कुल भी प्रशंसा नहीं करते हैं, और वे पूरी तरह से प्रभु के मार्ग से भटक गए हैं, यही कारण है कि परमेश्‍वर उन्हें अस्वीकार करते और खत्‍म करते हैं। धार्मिक जगत के पवित्र आत्मा के कार्यों को गंवाने का यही खास कारण है।

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ईसाई गीत  | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र उतरी है आदम हव्वा से, लेकिन भविष्य की मानव जाति, न होगी ...