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बुधवार, 25 सितंबर 2019

ईसाई गीत | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र

ईसाई गीत | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र

उतरी है आदम हव्वा से, लेकिन भविष्य की मानव जाति, न होगी अधीन शैतान के अब, होगा उनका उद्धार और होंगे वे शुद्ध। ये मानव जाति, गुज़र चुकी है दंड से, ये मानव जाति, की जा चुकी है पवित्र। ये अलग हैं उस प्राचीन वंश से, आदम हव्वा के प्राचीन वंश से, ये अलग हैं उस प्राचीन वंश से, आदम हव्वा के प्राचीन वंश से, इतने अलग कि मानो है एक, बिल्कुल नई जाति। ये होंगे उनमें से जिन्हें किया है शैतान ने भ्रष्ट, अटल होंगे परमेश्वर के अंतिम निर्णय में, ये है वो अंतिम समूह, जो हैं परमेश्वर के संग, कर सकता है प्रवेश अंतिम विश्राम में। अंतिम दिनों के दंड में, शुद्धिकरण की क्रिया में, जो रहेगा अटल और अचल, वो होंगे प्रवेश अंतिम विश्राम में। ये मानव जाति, गुज़र चुकी है दंड से, ये मानव जाति, की जा चुकी है पवित्र। शुद्धिकरण की यही अंतिम क्रिया है, जिसके ज़रिए विश्राम में प्रवेश करते लोग, हो जाएंगे आज़ाद शैतान की शक्ति से, और परमेश्वर करेगा उनको प्राप्त। वो करेंगे प्रवेश अंतिम विश्राम में। वो करेंगे प्रवेश अंतिम विश्राम में, हो जाएंगे आज़ाद शैतान की शक्ति से, वो प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में। वो करेंगे प्रवेश अंतिम विश्राम में। "वचन देह में प्रकट होता है" से

अनुशंसित: 2019 यीशु मसीह के गीत—— क्रूस के रास्ते पर चलो——ईसाई धर्म के अनिवार्य तत्व




रविवार, 14 जुलाई 2019

Hindi Best Christian Video | सौभाग्य और दुर्भाग्य | God Led Me to Live a Happy Life (Hindi Dubbed)

Hindi Best Christian Video | सौभाग्य और दुर्भाग्य | God Led Me to Live a Happy Life (Hindi Dubbed)
      एक गरीब परिवार में आने की वजह से, बहुत छोटी उम्र से ही डु जुआन एक बेहतर ज़िंदगी जीने के लिए बहुत सा धन कमाने को दृढ़-संकल्पित थी। अपने इस लक्ष्य को साकार करने के लिए, धन कमाने के लिए वह हाथ से जो कुछ भी काम कर सकती थी वह करने के लिए उसने बहुत जल्‍दी स्‍कूल की पढ़ाई छोड़ दी। काम मुश्किल और थकाने वाला होने पर भी वह शिकायत नहीं करती थी। हालाँकि, उसे वांछित परिणाम प्राप्‍त नहीं हुए। उसने चाहे कितनी ही कड़ी मेहनत क्‍यों न की, वह उस जीवन को न पा सकी जो वह अपने लिए चाहती थी। सन् 2008 में, बहुत सारा धन कमाने के सपने को मन में रखे, वह और उसका पति काम करने के लिए जापान चले गए। कुछ वर्षों के पश्‍चात्, कष्‍टदायक कार्य के दबाव और अत्यधिक कामकाज के घंटों ने उसे थकान से बीमार कर दिया। अस्‍पताल की जाँच के नतीजों ने उनकी मनोदशा को सबसे बुरी स्थिति में पँहुचा दिया, लेकिन अपने आदर्शों को साकार करने के लिए, डु जुआन हार मानने को तैयार नहीं थी।

गुरुवार, 11 जुलाई 2019

Hindi Christian Movie | ईमानदारी अनमोल है | Only the Honest Can Enter Into the Kingdom of Heaven

Hindi Christian Movie | ईमानदारी अनमोल है | Only the Honest Can Enter Into the Kingdom of Heaven (Hindi Dubbed)


झेन चेंग एक उपकरण मरम्मत की दुकान का मालिक थाI वह दयालु, ईमानदार था और कायदे से कारोबार करता थाI वह कभी किसी की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश नहीं करता था, बल्कि वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए मुश्किल से ही पैसा कमा पा रहा थाI कुछ समय बाद, उसके परिवार के सदस्य और एक साथी व्यापारी ने उसे कारोबार के हथकंडों को आजमाने के लिए उकसाया, और झेन चेंग उस कहावत पर विश्वास करने लगा जो एक शैतानी सिद्धांत को दर्शाती है: "बिना दूसरी आमदनी के आदमी कभी अमीर नहीं बन सकता, जैसे कि घोड़ा अगर रात में अपने तबेले में भूखा रहेगा तो कभी उसका वजन नहीं बढ़ेगाI" "मजबूत आदमी खा-खा कर मरता है; और कमजोर आदमी भूख से," "पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन इसके बगैर तुम कुछ भी नहीं कर सकतेI" और "पैसा सबसे पहले हैI"

शनिवार, 15 जून 2019

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie | "परमेश्वर में आस्था" (Hindi Dubbed)

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie | "परमेश्वर में आस्था" (Hindi Dubbed)


यू कोंगुआंग सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के साथ सुसमाचार को फैलाता है, और चीनी पुलिस की गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए उसे स्थानीय गृह-कलीसिया के एक सहकर्मी, झेंग ज़ुन द्वारा बचाया जाता है। उसके बाद वह झेंग ज़ुन और अन्‍य लोगों के साथ, परमेश्‍वर में आस्‍था क्या होती है, परमेश्‍वर की स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु कैसे विश्‍वास करना चाहिए, और सत्‍य के अन्‍य पहलुओं पर, कई बार संगति करता है। अंत में, ये सत्‍य झेंग ज़ुन और दूसरों की लंबे समय से चले आ रही भ्रांतियों और कठिनाइयों का समाधान करते हैं, और उन्हें "परमेश्‍वर में आस्था" के सही अर्थ को समझने देते हैं और उनके हृदयों को मुक्‍त कर देते हैं।

शुक्रवार, 3 मई 2019

Hindi Christian Movie | धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं | Have You Welcomed the Return of the Lord?

Hindi Christian Movie | धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं | Have You Welcomed the Return of the Lord?



शो योंघान दक्षिण कोरिया में एक कलीसिया के पादरी हैं। उन्होंने दशकों तक उत्साहपूर्वक परमेश्वर की सेवा की और अपने साथी विश्वासियों का गहरा सम्मान अर्जित किया। हाल के वर्षों से, उनकी कलीसिया दिन-प्रतिदिन ज्‍़यादा-से-ज्‍यादा उजाड़ होती जा रही है। बुरे कर्म अधिक-से-अधिक सामान्‍य हो रहे थे, और वे खुद भी अपने आप को इन पापों में फंसा पाते थे। परिणामस्वरूप, वे बेहद दुखी भ्रमित महसूस करते थे। ... बहुत विचार करने के बाद, उन्होंने संकल्‍पपूर्वक कलीसिया का अपना पद और अपना संप्रदाय छोड़ दिया और इस उम्‍मीद में ऐसी कलीसिया की खोज की जहां पवित्र आत्मा का कार्य हो, ताकि वे अपने पापों से मुक्‍त होने का अपना मार्ग प्राप्त कर सकें।

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

प्रश्न 2: हम लोग अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि परमेश्वर का राज्य धरती पर है या स्वर्ग में। प्रभु यीशु ने "स्वर्ग का राज्य पास में हैं" और "स्वर्ग का राज्य आता है" के बारे में बात की थी। अगर यह "स्वर्ग का राज्य," है तो यह स्वर्ग में होना चाहिये। यह धरती पर कैसे हो सकता है?

उत्तर: हमें एक बात स्पष्ट होनी चाहिये कि "स्वर्ग" को हमेशा परमेश्वर के रूप में, देखते हैं। "स्वर्ग का राज्य" यानी परमेश्वर का राज्य। प्रकाशित-वाक्य में लिखा है, "परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है।" "जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया।" इसका मतलब है कि परमेश्वर का राज्य पृथ्वी पर स्थापित होगा। अंत में, पृथ्वी का राज्य परमेश्वर का राज्य बनेगा। महाविपदा में पुराने विश्व के तबाह होने के बाद, सहस्राब्दि राज्य प्रकट होगा। पृथ्वी के राज्य हमारे प्रभु और उनके मसीह के राज्य बनेंगे। तब, परमेश्वर की इच्छा पृथ्वी पर, पूरी होगी, जैसी कि यह स्वर्ग में है। इससे भविष्यवाणी पूरी तरह से सच हो जाएगी: नया यरूशलेम पृथ्वी पर आ जाएगा।

शुक्रवार, 1 मार्च 2019

11. अपने कर्तव्य को करने और सेवा करने में क्या अंतर है?

11. अपने कर्तव्य को करने और सेवा करने में क्या अंतर है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
मनुष्य का अपना कर्तव्य निभाना, वास्तव में, उस सबका निष्पादन है जो मनुष्य के भीतर अन्तर्निहित है, अर्थात्, जो मनुष्य के लिए संभव है, उसका निष्पादन है। यह इसके बाद ही है कि उसका कर्तव्य पूरा होता है। मनुष्य की सेवा के दौरान मनुष्य के दोष उसके प्रगतिशील अनुभवों और न्याय के अनुभव की उसकी प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे कम होते जाते हैं; वे मनुष्य के कर्तव्य में बाधा हैं या प्रभाव नहीं डालते हैं। … मनुष्य के कर्तव्य और क्या वह धन्य या श्रापित है के बीच कोई सह-सम्बन्ध नहीं है। कर्तव्य वह है जो मनुष्य को पूरा करना चाहिए; यह उसका आवश्यक कर्तव्य है और प्रतिफल, परिस्थितियों या कारणों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

रविवार, 13 जनवरी 2019

2. अगर कोई केवल परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेता है, तो क्या यह परमेश्वर पर विश्वास की वास्तविक गवाही है?

परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, परमेश्वर का प्रेम, आशीषें, परमेश्वर को जानना,

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण क्या है और परमेश्वर में विश्वास की सच्ची गवाही क्या है, इस पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

2. अगर कोई केवल परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेता है, तो क्या यह परमेश्वर पर विश्वास की वास्तविक गवाही है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
शांतिमय पारिवारिक जीवन या भौतिक आशीषों के साथ, यदि तुम केवल परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेते हैं, तो तुमने परमेश्वर को प्राप्त नहीं किया है, और परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास पराजित हो गया है। परमेश्वर ने शरीर में अनुग्रह के कार्य के एक चरण को पहले ही पूरा कर लिया है, और मनुष्य को भौतिक आशीषें प्रदान कर दी हैं - परंतु मनुष्य को केवल अनुग्रह, प्रेम और दया के साथ सिद्ध नहीं किया जा सकता।

बुधवार, 7 नवंबर 2018

प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं

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प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं



वह क्या मार्ग है जिसके माध्यम से परमेश्वर लोगों को पूर्ण करता है? कौन-कौन से पहलू उसमें शामिल हैं? क्या तू परमेश्वर के द्वारा पूर्ण होना चाहता है? क्या तू परमेश्वर का न्याय और उसकी ताड़ना को ग्रहण करना चाहता है? तू इन प्रश्नों से क्या समझता है? यदि तू ऐसे ज्ञान की चर्चा नहीं कर सकता है तब यह स्पष्ट करता है कि तू अब तक परमेश्वर के कार्य को नहीं जान पाया और पवित्र आत्मा के द्वारा तू बिल्कुल भी प्रबुद्ध नहीं बनाया गया। ऐसा व्यक्ति पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है।

सोमवार, 5 नवंबर 2018

जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे

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जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे


पवित्र आत्मा का कार्य दिन ब दिन बदलता जाता है, हर एक कदम के साथ ऊँचा उठता जाता है; आने वाले कल का प्रकाशन आज से भी कहीं ज़्यादा ऊँचा होता है, कदम दर कदम और ऊपर चढ़ता जाता है। जिस कार्य के द्वारा परमेश्वर मनुष्य को सिद्ध करता है वह ऐसा ही है। यदि मनुष्य उस गति से चल न पाए, तो उसे किसी भी समय पीछे छोड़ा जा सकता है। यदि मनुष्य के पास आज्ञाकारी हृदय न हो, तो वह अंत तक अनुसरण नहीं कर सकता है। पूर्व का युग गुज़र गया है; यह एक नया युग है।

बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

सहस्राब्दि राज्य आ चुका है

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सहस्राब्दि राज्य आ चुका है


क्या तुम लोगों ने देखा है कि इस समूह के लोगों में परमेश्वर कौन सा कार्य पूर्ण करेगा? परमेश्वर ने कहा, कि यहाँ तक कि सहस्राब्दि राज्य में भी लोगों को उसके कथनों का पालन अवश्य करना चाहिए, और भविष्य में परमेश्वर के कथन अंततोगत्वा मनुष्य के जीवन को कनान के उत्तम देश में सीधे तौर पर मार्गदर्शन करेगा। जब मूसा जंगल में था, तो परमेश्वर ने सीधे तौर पर उसे निर्देश दिया और उससे बातचीत की।

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई

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तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई


6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य केवल मानवजाति के पूर्णरूपेण विकास की प्रवृत्ति के अनुसार धीरे-धीरे रूपान्तरित हुआ है; सृष्टि के आरंभ में इसकी पहले से योजना नहीं बनाई गई थी। संसार का सृजन करने से पहले, या इसके सृजन के ठीक बाद, यहोवा ने अभी तक कार्य के प्रथम चरण, व्यवस्था की; कार्य के दूसरे चरण—अनुग्रह की; और कार्य के तीसरे चरण—जीतने की योजना नहीं बनायी थी, जिनमें वह सबसे पहले लोगों के एक समूह—मोआब के कुछ वंशजों के बीच कार्य करता, और इससे वह समस्त ब्रह्माण्ड को जीतता।

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए

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तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए


     क्या तू परमेश्वर के किसी युग विशिष्ट स्वभाव को ऐसी उचित भाषा में अभिव्यक्त कर सकता है जिसका युग में महत्व हो? परमेश्वर के कार्य के अपने अनुभव से, क्या तू परमेश्वर के स्वभाव का वर्णन विस्तार से कर सकता है? तू कैसे सटीक रूप से, उचित रूप से उसका वर्णन कर सकता है? जिसके माध्यम से, दूसरे तेरे अनुभवों के बारे में सीख सकें। तू दयनीय, बेचारे और धार्मिकता के भूखे प्यासे धर्मी भक्त विश्वासियों के साथ, जो तेरी चरवाही की आस लगाए बैठे हैं, अपने दर्शनों और अनुभवों को कैसे बांटेगा?

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए

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अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए



मैंने तुम लोगों के बीच बहुत काम किया है और, निस्संदेह, बहुत से कथन भी कहे हैं। फिर भी मुझे पूरी तरह से महसूस होता है कि मेरे वचन और कार्य ने अंत के दिनों में मेरे कार्य के उद्देश्य को पूरी तरह से सम्पूर्ण नहीं किया है। क्योंकि, अंत के दिनों में, मेरा कार्य किसी खास व्यक्ति या खास लोगों के वास्ते नहीं है, बल्कि मेरे अन्तर्निहित स्वभाव को प्रदर्शित करने के लिए है।

शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

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केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है



वास्तव में, जो कार्य अब किया जा रहा है वह लोगों से शैतान का त्याग करवाने, उनके पुराने पूर्वजों का त्याग करवाने के लिए किया जा रहा है। वचन के द्वारा सभी न्यायों का उद्देश्य मानवता के भ्रष्ट स्वभाव को उजागर करना है और लोगों को जीवन का सार समझने में समर्थ बनाना है। ये बार-बार के न्याय मनुष्य के हदयों को छेद देते हैं। प्रत्येक न्याय सीधे उनके भाग्य पर प्रभाव डालता है और उनके हृदयों को घायल करने के आशय से है ताकि वे उन सभी बातों को जाने दें और फलस्वरूप जीवन के बारे में जान जाएँ, इस गंदी दुनिया को जान जाएँ, और परमेश्वर की बुद्धि और सर्वशक्तिमत्ता को जान जाएँ तथा इस शैतान के द्वारा भ्रष्ट की गई मानवजाति को जान जाएँ।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

तुम्हें अपने मार्ग के अंतिम चरण में कैसे चलना चाहिए

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तुम्हें अपने मार्ग के अंतिम चरण में कैसे चलना चाहिए


तुम सब अब अपने मार्ग के अंतिम चरण में हो, और यह इसका एक महत्वपूर्ण भाग है। शायद तुमने काफी दुःख सहा है, बहुत कार्य किया है, बहुत से मार्गों पर यात्रा की है, और बहुत उपदेशों को सुना है, और यहाँ तक पहुँचना सरल नहीं रहा है। यदि तुम उस दुःख को सह नहीं सकते जो तुम्हारे सामने है और यदि तुम वही करते रहते हो जो तुमने अतीत में किया था तो तुम सिद्ध नहीं किए जा सकते। यह तुम्हें डराने के लिए नहीं है — यह एक सच्चाई है।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

कार्य और प्रवेश (10)

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कार्य और प्रवेश (10)



मानवता का इतनी दूरी तक प्रगति कर लेना एक ऐसी स्थिति है जिसका कोई पूर्व उदाहरण नहीं। परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का प्रवेश कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हैं, और इस प्रकार परमेश्वर का कार्य भी एक शानदार मौका है जो बेमिसाल है। मनुष्य का आज तक का प्रवेश एक ऐसा आश्चर्य है जिसकी किसी मानव ने पहले कभी कल्पना नहीं की थी। परमेश्वर का कार्य अपने शिखर पर पहुँच गया है—और, बाद में, मनुष्य का "प्रवेश"[1] भी अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया है। परमेश्वर ने अपने आप को इतना नीचे उतारा है जितना कि वह संभवतः उतार सकता था, और कभी भी उसने मानव जाति या विश्व की सारी चीजों के सामने विरोध नहीं किया।

बुधवार, 10 अक्टूबर 2018

कार्य और प्रवेश (8)

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कार्य और प्रवेश (8)


मैंने कई बार कहा है कि परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य का उद्देश्य है प्रत्येक व्यक्ति की आत्मा को बदलना, प्रत्येक व्यक्ति की रूह को बदलना, ताकि उनके दिल में, जिसने अत्यंत आघात को सहा है, सुधार लाया जा सके, जिससे उनकी उस आत्मा को बचाया जा सके जिसे गंभीर रूप से बुराई द्वारा हानि पहुंचाई गई है; इसका उद्देश्य लोगों की आत्माओं को जगाना है, उनके बर्फ़ जैसे जमे हुए दिलों को पिघलाना है, और उनका जीर्णोद्धार करना है।

शनिवार, 29 सितंबर 2018

केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं

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केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं


यह स्वर्ग का नियम और पृथ्वी का सिद्धांत है कि परमेश्वर पर विश्वास किया जाए और उसको जाना जाए, और आज - इस युग के दौरान जब देहधारी परमेश्वर स्वयं अपना कार्य करता है - यह परमेश्वर को जानने के लिए विशेष अच्छा समय है। परमेश्वर को संतुष्ट करना उसकी इच्छा को समझने पर आधारित है, और परमेश्वर की इच्छा को जानने के लिए, परमेश्वर को अच्छी तरह से जानना आवश्यक है। परमेश्वर की यह जानकारी एक दर्शन है जो एक विश्वासी के पास होना चाहिए; यह परमेश्वर में मनुष्य के विश्वास का आधार है।

गुरुवार, 20 सितंबर 2018

विजयी कार्यों का आंतरिक सत्य (3)

विजयी कार्यों का आंतरिक सत्य (3)



विजयी कार्य द्वारा मुख्य रूप से यह परिणाम हासिल करने का प्रयास किया जाता है कि मनुष्य की देह को विद्रोह से रोका जाए, अर्थात मनुष्य का मस्तिष्क परमेश्वर की नई समझ हासिल करे, उसका दिल पूरी तरह से परमेश्वर की आज्ञा का पालन करे, और वह परमेश्वर का होने के लिए संकल्प करे। किसी व्यक्ति के स्वभाव या देह कैसे परिवर्तित होते हैं, वह यह निर्धारित नहीं करता कि उस पर विजय प्राप्त की गई है या नहीं। बल्कि, जब तुम्हारी सोच, तुम्हारी चेतना और तुम्हारी भावना बदलती है—अर्थात, जब तुम्हारी पूरी मनोवृत्ति में बदलाव होता है—तब परमेश्वर तुम पर विजय प्राप्त कर चुका होता है।

ईसाई गीत | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र

ईसाई गीत  | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र उतरी है आदम हव्वा से, लेकिन भविष्य की मानव जाति, न होगी ...