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सोमवार, 31 दिसंबर 2018

2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?

परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, अवतरण, परमेश्वर की इच्छा,

XIII. अंतिम दिनों में चीन में परमेश्वर के देह-धारण के महत्त्व पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक चरण सारी मानवजाति के वास्ते है, और समूची मानवजाति की ओर निर्देशित है। यद्यपि यह देह में उसका कार्य है, फिर भी इसे अब भी सारी मानवजाति की ओर निर्देशित किया गया है; वह सारी मानवजाति का परमेश्वर है, वह सभी सृजे गए और न सृजे गए प्राणियों का परमेश्वर है। यद्यपि देह में उसका कार्य एक सीमित दायरे के भीतर होता है, और इस कार्य का विषय भी सीमित होता है, फिर भी हर बार जब वह अपना कार्य करने के लिए देह धारण करता है तो वह अपने कार्य का एक विषय चुनता है जो अत्यंत प्रतिनिधिक है; वह सामान्य एवं मामूली लोगों के एक समूह को नहीं चुनता है कि उन पर कार्य करे, किन्तु इसके बजाए अपने कार्य के विषय के रूप में लोगों के ऐसे समूह को चुनता है जो देह में उसके कार्य के प्रतिनिधि होने में सक्षम हैं।

रविवार, 30 दिसंबर 2018

1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?

परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, अवतरण, यीशु का दूसरा आगमन,

XIII. अंतिम दिनों में चीन में परमेश्वर के देह-धारण के महत्त्व पर हर किसी को स्पष्ट रूप से सहभागिता करनी चाहिए

1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है" (मलाकी 1:11)।
"क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
कई जगहों पर, परमेश्वर ने सिनीम के देश में जीतने वालों के एक समूह को प्राप्त करने की भविष्यवाणी की है। दुनिया के पूर्व में जीतने वालों को प्राप्त किया जाता है, इसलिए परमेश्वर के दूसरे देहधारण के अवतरण का स्थान बिना किसी संदेह के, सिनीम का देश है, ठीक वहीं जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मारे पड़ा है।

रविवार, 16 दिसंबर 2018

3. हर व्यक्ति को देहधारी मसीह और झूठे मसीहों/झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच रहे अंतर को अवश्य पहचानना चाहिए।

परमेश्वर की गवाही देते बीस सत्य, अवतरण, मसीह, परमेश्वर को जानना,

VIII. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच अंतर से सम्बंधित सच्चाई पर हर किसी को स्पष्ट रूप से अवश्य ही सहभागिता करनी चाहिए

3. हर व्यक्ति को देहधारी मसीह और झूठे मसीहों/झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच रहे अंतर को अवश्य पहचानना चाहिए।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:24)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (यूहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने के समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा।

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

2. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के कार्य करने के तरीके और जिस तरह राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कार्य करता है, इनके बीच क्या अंतर है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अनुग्रह का युग, राज्य का युग, अवतरण

V. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य और अनुग्रह के युग में उसके छुटकारे के कार्य के बीच रहे अंतर से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

2. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के कार्य करने के तरीके और जिस तरह राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कार्य करता है, इनके बीच क्या अंतर है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अपने पहले देहधारण के दौरान, बीमारों को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना परमेश्वर के लिए आवश्यक था क्योंकि उसका कार्य छुटकारा दिलाना था। सम्पूर्ण मानव जाति को छुटकारा दिलाने के लिए, उसे दयालु और क्षमाशील होने की आवश्यकता थी। सलीब पर चढ़ने से पहले उसने जो कार्य किया वह बीमार को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना था, जो उसके द्वारा मनुष्य के पाप और गंदगी से उद्धार के पूर्वलक्षण थे।

गुरुवार, 6 दिसंबर 2018

1. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु द्वारा व्यक्त वचनों और राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचनों में क्या अंतर है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अनुग्रह का युग, राज्य का युग, अवतरण

V. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य और अनुग्रह के युग में उसके छुटकारे के कार्य के बीच रहे अंतर से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

1. अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु द्वारा व्यक्त वचनों और राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचनों में क्या अंतर है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है" (मत्ती 4:17)।
"और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा" (लूका 24:47)।
"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।" (यूहन्ना 12:47-48)।
"क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1पतरस 4:17)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आरम्भ में, यीशु ने सुसमाचार को फैलाया और पश्चाताप के मार्ग का उपदेश दिया, फिर वह मनुष्य को बपतिस्मा देने लगा, बीमारियों को चंगा करने लगा, और दुष्टात्माओं को निकालने लगा। अंत में, उसने मानवजाति को पाप से छुटकारा दिया और सम्पूर्ण युग के अपने कार्य को पूरा किया।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (1)" से
यीशु का काम केवल मनुष्य के उद्धार और क्रूसित होने के लिए था। इस प्रकार, किसी भी व्यक्ति को जीतने के लिए उसे अधिक शब्द कहने की कोई जरूरत नहीं थी। उसने जो कुछ भी सिखाया उसमें से काफी कुछ शास्त्रों के शब्दों से लिया गया था, और भले ही उसका काम शास्त्रों से आगे नहीं बढ़ा, फिर भी वह क्रूसित होने के काम को पूरा कर पाया। उसका काम शब्द का नहीं था, न ही मानव जाति पर विजय पाने के लिए था, बल्कि मानव जाति का उद्धार करने के लिए था।

रविवार, 25 नवंबर 2018

3. परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के बीच सभी का पारस्परिक संबंध।

II. मानव जाति के उद्धार के लिए परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के बारे में सच्चाई के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

3. परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के बीच सभी का पारस्परिक संबंध।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यहोवा के कार्य से ले कर यीशु के कार्य तक, और यीशु के कार्य से लेकर इस वर्तमान चरण तक, ये तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन की पूर्ण परिसीमा को आवृत करते हैं, और यह समस्त एक ही पवित्रात्मा का कार्य है। जब से उसने दुनिया बनाई, तब से परमेश्वर हमेशा मानव जाति का प्रबंधन करता आ रहा है। वही आरंभ और अंत है, वही प्रथम और अंतिम है, और वही एक है जो युग का आरंभ करता है और वही युग का अंत करता है। कार्य के तीन चरण, विभिन्न युगों और विभिन्न स्थानों में, निश्चित रूप से एक ही पवित्रात्मा द्वारा किए जाते हैं। वे सभी जो इन तीन चरणों को पृथक करते हैं, परमेश्वर का विरोध करते हैं।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)" से
… अंत के दिनों में किया गया कार्य व्यवस्था के युग या अनुग्रह के युग के कार्य का स्थान नहीं ले सकता है। हालाँकि, तीनों चरण आपस में एक दूसरे से जुड़कर एक सत्त्व बन जाते हैं और सभी एक ही परमेश्वर के द्वारा किये गए कार्य हैं। स्वाभाविक रूप में, इस कार्य का क्रियान्वयन तीन अलग-अलग युगों में विभाजित है। अंत के दिनों में किया गया कार्य हर चीज़ को समाप्ति की ओर ले जाता है; जो कुछ व्यवस्था के युग में किया गया वह आरम्भ का कार्य है; और जो अनुग्रह के युग में किया गया वह छुटकारे का कार्य है।

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

10. यह क्यों है कि केवल देह-धारी परमेश्वर के कार्य के अनुभव और आज्ञा-पालन करने के द्वारा ही कोई परमेश्वर को जान सकता है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, परमेश्वर को जानना, परमेश्वर की इच्छा

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

10. यह क्यों है कि केवल देह-धारी परमेश्वर के कार्य के अनुभव और आज्ञा-पालन करने के द्वारा ही कोई परमेश्वर को जान सकता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा" (युहन्‍ना 1:14)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते; और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है" (युहन्‍ना 14:6-7)।
"मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है …" (युहन्‍ना 14:10)।
"मैं और पिता एक हैं" (युहन्‍ना 10:30)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
जब परमेश्वर ने देहधारण नहीं किया था, तब जो कुछ वह कहता था लोग उसे काफी हद तक नहीं समझते थे क्योंकि वह पूर्ण दिव्यता से आया था। वह दृष्टिकोण और सन्दर्भ जिन के बारे में वह कहता था वह मानव जाति के लिए अदृश्य और अगम्य था; वह आध्यात्मिक आयाम से प्रकट होता था जिसे लोग समझ नहीं सकते थे। ऐसे लोग जिन्होंने देह में जीवन बिताया था, वे आध्यात्मिक आयाम से होकर गुज़र नहीं सकते थे।

बुधवार, 21 नवंबर 2018

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, परमेश्वर को जानना

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे। बहुत से देशों के लोग आएँगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्‍वर के भवन में जाएँ; तब वह हमको अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल और अपने भालों को हँसिया बनाएँगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे। हे याकूब के घराने, आ, हम यहोवा के प्रकाश में चलें" (यशायाह 2:2-5)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अंत के दिनों के देहधारी परमेश्वर का आगमन अनुग्रह के युग के अंत को लाया है। वह मुख्य रूप से अपने वचनों को कहने, मनुष्य को पूर्ण बनाने के लिए वचनों का उपयोग करने, मनुष्य को रोशन और प्रबुद्ध करने, और मनुष्य के हृदय से अज्ञात परमेश्वर के स्थान को हटाने के लिए आया है। यह कार्य का वह चरण नहीं है जो यीशु ने तब किया था जब वह आया था। जब यीशु आया, तो उसने कई चमत्कार किए, उसने बीमारों को चंगा किया और पिशाचों को निकाला, और सलीब पर चढ़ने का छुटकारे का कार्य पूर्ण किया।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

7. यह क्यों कहा जाता है कि परमेश्वर का दो बार देहधारी होना देह-धारण की महत्ता को पूरा करता है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, यीशु का दूसरा आगमन, परमेश्वर को जानना

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

7. यह क्यों कहा जाता है कि परमेश्वर का दो बार देहधारी होना देह-धारण की महत्ता को पूरा करता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ; और जो लोग उसकी बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा" (इब्रानियों 9:28)।
"आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था" (युहन्ना 1:1)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
प्रथम देहधारण यीशु की देह के माध्यम से मनुष्य को पाप से छुटकारा देने के लिए था, अर्थात्, उसने मनुष्य को सलीब से बचाया, परन्तु भ्रष्ट शैतानी स्वभाव तब भी मनुष्य के भीतर रह गया था। दूसरा देहधारण अब और पापबलि के रूप में कार्य करने के लिए नहीं है परन्तु उन्हें पूरी तरह से बचाने के लिए है जिन्हें पाप से छुटकारा दिया गया था।

शनिवार, 17 नवंबर 2018

3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, यीशु का दूसरा आगमन, मसीह

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मूसा ने कहा, "मुझे अपना तेज दिखा दे। उसने कहा, … तू मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता; क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता" (निर्गमन 33:18-20).
"और यहोवा सीनै पर्वत की चोटी पर उतरा; और मूसा को पर्वत की चोटी पर बुलाया, और मूसा ऊपर चढ़ गया। तब यहोवा ने मूसा से कहा, "नीचे उतर के लोगों को चेतावनी दे, कहीं ऐसा न हो कि वे बाड़ा तोड़ के यहोवा के पास देखने को घुसें, और उनमें से बहुत से नष्‍ट हो जाएँ" (निर्गमन 19:20-21)।
"सब लोग गर्जन और बिजली और नरसिंगे के शब्द सुनते, और धूआँ उठते हुए पर्वत को देखते रहे, और देख के, काँपकर दूर खड़े हो गए; 19और वे मूसा से कहने लगे, "तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्‍वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएँ" (निर्गमन 20:18-19)।
"तब यह आकाशवाणी हुई, मैं ने उसकी महिमा की है, और फिर भी करूँगा।" तब जो लोग खड़े हुए सुन रहे थे उन्होंने कहा कि बादल गरजा। दूसरों ने कहा, "कोई स्वर्गदूत उससे बोला" (युहन्ना 12:28-29)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के द्वारा मनुष्य को सीधे तौर पर पवित्रात्मा के साधनों के माध्यम से या आत्मा के रूप में बचाया नहीं जाता है, क्योंकि उसके आत्मा को मनुष्य के द्वारा न तो देखा जा सकता है और न ही स्पर्श किया जा सकता है, और मनुष्य के द्वारा उस तक पहुँचा नहीं जा सकता है। यदि उसने आत्मा के तरीके से सीधे तौर पर मनुष्य को बचाने का प्रयास किया होता, तो मनुष्य उसके उद्धार को प्राप्त करने में असमर्थ होता।

शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, यीशु का दूसरा आगमन, मसीह

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।" (युहन्ना 1:14)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (युहन्ना 14:6)।
"यीशु ने उससे कहा, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्‍वास करो" (युहन्ना 14:9-11)।
"मैं और पिता एक हैं" (युहन्ना 10:30)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
देहधारण का अर्थ यह है कि परमेश्वर देह में प्रकट होता है, और वह अपनी सृष्टि के मनुष्यों के मध्य देह की छवि में कार्य करने आता है। इसलिए, परमेश्वर को देहधारी होने के लिए, उसे सबसे पहले देह, सामान्य मानवता वाली देह अवश्य होना चाहिए; यह, कम से कम, सत्य अवश्य होना चाहिए।

गुरुवार, 15 नवंबर 2018

1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, राज्य का युग, यीशु का दूसरा आगमन

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (लूका 12:40)।
"क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ" (लूका 17:24-25)।
"आधी रात को धूम मची: 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)।
"देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)।
"देख, मैं चोर के समान आता हूँ; धन्य वह है जो जागता रहता है, और अपने वस्त्र की चौकसी करता है कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें" (प्रकाशितवाक्य 16:15)।
"तब मैं ने उसे, उस शब्द को जो मुझ से बोल रहा था, देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैं ने सोने की सात दीवटें देखीं, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सदृश एक पुरुष को देखा, जो पाँवों तक का वस्त्र पहिने, और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए था। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के समान उज्ज्वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्ठी में तपाया गया हो, और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी। उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है" (प्रकाशितवाक्य 1:12-16)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यीशु ने कहा था कि वह उसी तरह से आएगा जैसे वह गया था, किन्तु क्या उसके वचनों के सही अर्थ को जानते हो? क्या वह वास्तव में तुमसे कह सका होगा? तुम केवल यही जानते हो कि वह बादल पर उसी तरह से आएगा जैसे वह गया था, किन्तु क्या तुम ठीक-ठीक जानते हो कि परमेश्वर स्वयं अपना कार्य कैसे करता है? यदि तुम वास्तव में देखने में सक्षम होते,तब यीशु के वचनों को कैसे समझाया जाता?

रविवार, 4 नवंबर 2018

परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, अवतरण, मसीह, परमेश्वर को जानना

परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार


पहला देहधारी परमेश्वर पृथ्वी पर साढ़े तैंतीस साल रहा, फिर भी उसने अपनी सेवकाई को उन सालों में से केवल साढ़े तीन साल तक ही किया। अपना कार्य करने के दौरान और अपना कार्य आरम्भ करने से पहले, इन दोनों समयों में, वह अपनी सामान्य मानवता को धारण किए हुए था। वह अपनी साधारण मानवता में साढ़े तैंतीस साल तक रहा। पूरे साढ़े तीन साल तक उसने अपने आप को देहधारी परमेश्वर के रूप में प्रकट किया।

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन, मसीह, अवतरण, प्रभु यीशु

पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में


यदि आप परमेश्वर के उपयोग के लिए उपयुक्त होने की कामना करते हैं; तो आपको उस कार्य के बारे में जानना होगा जिसे उसने पहले किया था (नए एवं पुराने नियम में); और, इसके अतिरिक्त, आपको उसके वर्तमान कार्य को जानना होगा। कहने का तात्पर्य है, आपको 6,000 सालों से ऊपर के परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना होगा। यदि आपको सुसमाचार फैलाने के लिए कहा जाये, तो आप परमेश्वर के कार्य को जाने बिना ऐसा करने में सक्षम नहीं होंगे।

ईसाई गीत | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र

ईसाई गीत  | सिर्फ़ वही प्रवेश करेंगे अंतिम विश्राम में जो हो चुके हैं पवित्र उतरी है आदम हव्वा से, लेकिन भविष्य की मानव जाति, न होगी ...